Thursday, 15 November 2012

हिलाल साहिब नहीं रहे


शख्सियत

हिलाल साहिब नहीं रहे

डा. वीरेन्द्र पुष्पक का 15 नवम्बर को करीब 7 बजे (रात्रि) फोन आया। वह सिर्फ यही कह पाये कि हिलाल साहिब नहीं रहे। इस एक वाक्य ने अजीब सी बेचैनी पैदा कर दी। यह कहने को तो एक वाक्य ही था मगर एक युग को समेटे हुए। एक नहीं अनेक शायरों ने हिलाल का जलाल देखा है। हिलाल साहिब का भले ही विदा होते हुए नाम हिलाल ही रहा हो मगर वो पूरी जरह से जलाल थे। तन्जो मिज़ाह का यह शायर हिन्दुस्तान की सरहदों से बाहर पाकिस्तान, इराक, कुवैत, आस्ट्रेलिया आदि में भी अपने उसी जलाल के साथ जाना-पहचाना गया जिस जलाल के साथ हिन्दुस्तान में। हिलाल स्योहारवी को वर्ष 1989 में तत्कालीन राष्ट्रपति डा. शंकर दयाल शर्मा मिर्जा गालिब सम्मान से सम्मानित कर चुके हैं।

हिलाल साहिब के असमय चले जाने पर दुखी हो डा. वीरेन्द्र पुष्पक कहते हैं- वयोवृद्ध एवं अंतर्राष्ट्रीय शायर हिलाल स्योहारवी की नई पुस्तक ‘‘नुक्ता ए नजर’’ जो कि परिलेख प्रकाशन, नजीबाबाद से प्रकाशित हुई है, का विमोचन एवं जश्ने हिलाल का आयोजन करने का सपना अधूरा रह गया।



स्योहारा में जन्में हबीबुर्रहमान पुत्र फजल हक की शिक्षा स्योहारा और अलीगढ़ में सम्पन्न हुई। शायरी के क्षेत्र में आपकी पहचान हिलाल स्योहारवी के रूप में हुई। हिलाल का अर्थ है- नया चाँद। हिलाल साहिब की शायरी के जलाल (प्रताप, तेज़, अज़मत) ने उन्हें और भी ऊँचाइयों पर स्थापित कर दिया। उनके उस्ताद अब्दुल खालिक निहाल स्योहारवी को अपने इस शागिर्द पर यू ही नाज़ नहीं था।

हिलाल स्योहारवी ने 41 वर्षो तक अपर गैंगेज स्योहारा शुगर मिल में ईमानदारी के साथ नौकरी की। इसी दौरान आपको शायरी का चस्का लग गया। उस्ताद के रूप में निहाल साहिब मिले तो आप में निखार आ गया। आपके द्वारा रचित ग़ज़ल, नज़्म और कतआ अनेक संग्रहों फरेबे सहर, फरेबे नज़र, अंगूठा छाप, अगर बुरा न लगे (उर्दू) धुंधला सवेरा और नुक़ता ए नज़र (हिन्दी) में संग्रहित हैं।

हिलाल साहिब ने मुम्बई का भी रुख किया यहीं पर उनकी सुपरस्टार रहे दिलीप कुमार और जानी वाकर से दोस्ती हो गई।

हिलाल साहिब के नजदीकी डा. मनोज वर्मा  कहते हैं- स्योहारा वासियों के लिए उनकी पुस्तक का विमोचन ही उनके लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

हिलाल साहिब को श्रद्धांजलि देते हुए मशहूर शायर जनबा महेन्द्र अश्क कहते हैं-
                           जिन्दगी जिसपे नाज़ करती है।
                           उसको जाहो जलाल कहते हैं।।
                           और जिस पे है शायरी नाज़ा।
                           लोग उसको हिलाल कहते हैं।।
-अमन कुमार त्यागी
PARILEKH PRAKASHAN  NAJIBABAD Mob-09897742814

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